🌿 करेला खेती – Step by Step गाइड
(आदर्श कुमार पटेल, कठिन्द्रा, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश के अनुभव पर आधारित)
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1️⃣ खेत की तैयारी
खेत की गहरी जुताई करें।
मिट्टी को भुरभुरी और जल निकासी योग्य बनाएं।
15–20 दिन पहले गोबर की सड़ी हुई खाद या कंपोस्ट डालें।
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2️⃣ बुवाई का समय
उत्तरी भारत में जून के अंतिम सप्ताह से बुवाई सबसे सही रहती है।
बीज बोने से पहले 10–12 घंटे पानी में भिगो दें।
बीजों को 3 फीट लंबाई में और 6–7 फीट चौड़ाई में दूरी पर बोएं।
पौधों के लिए मेढ़ (medi) और बीच में पानी की नाली बना दें।
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3️⃣ शुरुआती देखभाल
पौधे निकलने के बाद रोज़ शाम को 1 लीटर पानी प्रति पौधा दें।
पौधे जब 30–60 सेमी तक बड़े हो जाएं तो किनारे-किनारे मजबूत मेढ़ बना दें।
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4️⃣ बेलों को सहारा देना
बुवाई के 15–20 दिन बाद बांस और तार से जाल (Trellis) बना लें।
ऊँचाई – 6–7 फीट,
दूरी – लंबाई और चौड़ाई दोनों तरफ 6 फीट।
जाल का घर (mesh) – 15×15 सेमी का।
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5️⃣ खाद और दवाओं का प्रबंधन
हर 5–7 दिन पर छिड़काव करें (औसत खर्च ₹500–₹700 प्रति बार)।
हर 15 दिन पर पौधों की जड़ों से 15 सेमी दूर DAP, Calcium, Tatak Jai जैसी खाद डालें।
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6️⃣ फसल का समय और उत्पादन
बुवाई के 45 दिन बाद पहली तोड़ाई होती है (10 किलो तक)।
इसके बाद हर 5–7 दिन पर 15–20 किलो उत्पादन।
फिर बेलों की बढ़वार के साथ हर तीसरे दिन 25–150 किलो तक उत्पादन होता है।
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7️⃣ फलों की देखभाल
छोटे फलों को पत्तियों और टहनियों से निकालकर नीचे लटकाएँ।
इससे फल सीधे और लंबे होंगे।
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8️⃣ तोड़ाई और बिक्री
तोड़ाई हर तीसरे दिन शाम 4–5 बजे करें।
फलों को घर पर धोकर 4–5 बोरियों में भरें।
सुबह 5 बजे तक मंडी पहुँचा दें।

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