प्रतापगढ़ (उ.प्र.)। आज के समय में जहाँ किसान महज़ गुज़ारे भर की खेती करने को मजबूर नज़र आते हैं, वहीं प्रतापगढ़ ज़िले के तीन किसानों ने साबित कर दिया है कि मेहनत और तकनीकी खेती से छोटी ज़मीन पर भी बड़ा मुनाफ़ा कमाया जा सकता है।
कठिन्द्रा गाँव के आदर्श कुमार पटेल, राजेश और प्यारे लाल पटेल ने करेले की खेती से लाखों रुपये का मुनाफ़ा कमाकर न केवल अपनी ज़िंदगी में बदलाव लाया है बल्कि गाँव और ज़िले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं।
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🌿 आदर्श कुमार पटेल – 15 बिस्वा में 1 लाख की कमाई
कठिन्द्रा गाँव के रहने वाले आदर्श कुमार पटेल ने 15 बिस्वा ज़मीन पर करेले की खेती की और महज़ कुछ ही महीनों में लगभग 1 लाख रुपये की कमाई की।
उन्होंने जून के अंतिम सप्ताह में बुवाई की, रोज़ शाम पौधों को पानी दिया और पौधे बड़े होने पर मचान (ट्रेलिस) बना दिया।
हर 5–7 दिन पर दवा का छिड़काव और हर 15 दिन पर DAP व कैल्शियम जैसी खाद डालने से उनकी फसल ने ज़बरदस्त उत्पादन दिया।
हर तीसरे दिन 25–150 किलो तक करेला तैयार हुआ और मंडी में 40–80 रुपये प्रति किलो का भाव मिला।
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🌿 राजेश – 4 बिस्वा में 30–40 हज़ार रुपये की सफलता
दूसरे किसान राजेश ने केवल 4 बिस्वा ज़मीन पर करेला लगाकर सबको चौंका दिया।
उन्होंने भी वही तकनीक अपनाई – नियमित सिंचाई, मचान पद्धति और संतुलित खाद व दवाओं का प्रयोग।
नतीजा यह रहा कि उनकी छोटी सी ज़मीन से ही 30–40 हज़ार रुपये की कमाई हो गई।
यह देखकर गाँव के किसानों को विश्वास हुआ कि कम ज़मीन पर भी करेला खेती मुनाफ़े का सौदा साबित हो सकती है।
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🌿 प्यारे लाल पटेल – 10 बिस्वा से 60–80 हज़ार की कमाई
इसी कड़ी में गाँव के एक और किसान प्यारे लाल पटेल ने 10 बिस्वा ज़मीन पर करेला लगाकर 60–80 हज़ार रुपये की कमाई की।
हर तीसरे दिन तोड़ाई में 25–150 किलो तक उत्पादन मिला। मंडी में दाम अच्छा मिलने से वे हर बार 3–5 हज़ार रुपये की बिक्री कर लेते थे।
उनकी मेहनत और तकनीक ने साबित कर दिया कि करेला खेती वास्तव में किसानों के लिए “हरी सोना” साबित हो सकती है।
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🚜 प्रेरणा की मिसाल
आदर्श, राजेश और प्यारे लाल पटेल – तीनों की कहानियाँ यह दिखाती हैं कि करेले की खेती अगर सही तकनीक और मेहनत से की जाए तो यह बेहद लाभकारी है।
कम ज़मीन, कम लागत और ज़्यादा मुनाफ़े के कारण अब गाँव के अन्य किसान भी इस पद्धति से प्रेरित होकर करेले की खेती की ओर बढ़ रहे हैं।

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